योग की शक्ति,योग क्या है? और इसके आठ अंग !Yoga In Hindi

योग/Yoga का मतलब होता है स्वयं से जुड़ाव। योग हमारे मन की व्रतियों को स्थिर करता है। चित/मन की वृत्तियों के रुक जाने पर आत्मा अपने स्वरूप में स्थिर हो जाती है। योग को मन और शरीर के अभ्यास के रूप में जाना जाता है। योग की विभिन्न शैलियाँ शारीरिक मुद्राएँ और ध्यान को जोड़ती हैं।योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, इसमें व्यक्ति का केवल दैहिक पहलू  ही शामिल नहीं होता अपितु आध्यात्मिक और मानसिक पक्ष भी निहित होते हैं। योग अभ्यास में कई अलग-अलग प्रकार के योग और कई अनुशासन सम्मिलित हैं। आइये इस लेख की सहायता से योग क्या है (Yog Kya hai), योग की शक्ति,अष्टांग योग, योग के फायदे (Yoga Benefits in Hindi) और नुकसानों पर प्रकाश डालने का प्रयास करते हैं।

योग क्या है?-Yoga In Hindi

योग(Yoga In Hindi) का प्रथम सूत्र जीवन ऊर्जा है। योग का अर्थ होता है जोड़। योग में इतनी शक्ति होती है, कि यह आपको अमरत्व की प्राप्ति करा सकता है। योग सिर्फ व्यायाम नहीं ये आत्मा से जुड़ा वह विज्ञान है, जिसका प्रभाव शरीर के सभी स्नायु तंत्र पर पड़ता है। मन एकाग्रता की ओर अग्रसर होता है, विचारों में ठहराव व शरीर अनुशासन में बँट जाता है। योग में वह आनन्द है, जो आत्मा में छिपा रहता है, मौन में छिपा रहता है। योग कहता है कि हमारे भीतर अनंत सम्पदाओं का विस्तार है लेकिन वे सभी स्वचेतन होने से जाग्रत हो पाएँगी। योग दर्शन में बताया गया है कि जब तक आत्मा सांसारिक पदार्थों में आसक्त रहती है, अपने-आपको उसमें लीन किए रहता है। उस समय तक उसे दुःख-सुख होता है। आत्मा और प्रकृति का संयोग ही क्लेशों का कारण है।

योग के आठ अंग है, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान और समाधि। किसी भी योगासन की क्रिया को स्वचित्त में लाने से पूर्व उससे आत्मसात होना ही सच्चा योग है। मन संयम करने की पहली विधि यह है कि थोड़े समय के लिए नेत्र मूँदकर शांत बैठ जाएँ और मन को अपनी इच्छानुसार दौड़ने दें क्योंकि मन की क्रियाओं को जानना ही योग से जुड़ना जैसा है। योगासन करने की विधि व लाभ समझने से पूर्व स्वयं की ऊर्जा को पहचानें।

योग की शक्ति- power of yog In Hindi

योग आसन द्वारा हमारे शरीर के प्रत्येक अंग को व्यायाम करने का मौका मिलता है, जिससे शरीर बलवान बनता है। प्रत्येक अंग सुचारू रूप से कार्य करने लगता है। अतः कुल मिलाकर हमारी आयु में वृद्धि होती है। स्वस्थ रहने वाला व्यक्ति सदा प्रसन्नचित्त रहता है एवं उसके सगे संबंधियों एवं मित्र भी उससे मिलकर प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। शरीर स्वस्थ होगा तो हमारे पास रोगों से लड़ने की शक्ति भी अधिक होगी। स्वस्थ व्यक्ति कठिन से कठिन परिश्रम करने में भी सदैव आगे रहते हैं एवं जटिल परिस्थतियों का सामना आसानी से कर लेते हैं। यदि आपका शरीर स्वस्थ है तो आपकी त्वचा भी स्वस्थ रहेगी और कील-मुँहासे एवं अन्य चर्मरोग जैसे एलर्जी आदि कभी भी आपको परेशान नहीं करेंगे।

योग के वैज्ञानिक कारण- scientific benefits of yoga In Hindi

योग क्या-क्या करता एवं इसके क्या फायदे मिलते है यह तो इसका प्रयोग करने पर ही मालूम हो सकता है। फिर भी हमने कुछ शब्दों में इस बात को बताने की कोशिश की है। योग साधना के मार्ग में प्रवृत्त होने पर उदर के रोग जैसे अपच, अरुचि, अजीर्ण, क़ब्ज़, गैस, खट्टी डकार आदि में लाभ मिलता है। योग में बताए आहार से रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग जैसी घातक बीमारियों से बचा जा सकता है। शांति एवं संतोष की भावना स्वभाविक रूप से जीवन में समाहित हो जाती है। छल-कपट, झूठ, चोरी एवं चरित्रहीनता से साधक दूर ही रहता है। जिस कारण व्यक्तिगत एवं सामाजिक, दोनों स्तरों पर नैतिकता का विकास होता है। योग हमें शारीरिक संपन्नता के साथ मानसिक शक्ति भी प्रदान करता है। जिससे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। योग निद्रा, एवं ध्यान के द्वारा हम अपनी स्मृति क्षमता को भी बढ़ा सकते हैं। योग हमारी कार्यकुशलता एवं कार्यक्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करता है। योग से हमारे शरीर के परिसंचरण-तंत्र, पाचन-तंत्र, श्वसन-तंत्र एवं उत्सर्जन-तंत्र क्रियाशील हो जाते हैं। वैज्ञानिक परीक्षणों से यह सिद्ध हो गया है कि आयु बढ़ने के साथ-साथ होने वाली शारीरिक शिथिलता एवं वैचारिक अस्थिरता का निदान योगाभ्यास के द्वारा किया जा सकता है। योग द्वारा हम अपनी नकारात्मकता को दूर कर सकते हैं एवं अपनी रोगनाशक शक्ति का विकास कर सकते हैं।

पूरे शरीर में तीव्रता आ जाती है। शरीर हल्का हो जाता है। शरीर में स्फूर्ति आ जाती है। सन्धि जोड़ खुल जाने के कारण उनमें फेंसी हुई वायु रक्त संचार की तीव्रता के कारण वहाँ से निकल जाती है। पूरे शरीर को एक प्रकार की नई ताज़गी, चेतनता प्राप्त होती है। मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह तीव्र होने से उसे क्रियाशील बनाता है। इस प्रकार हमारे पैर के अँगूठे से लेकर टखना, पिंडली, घुटना, जंघा, नितंब, उपस्थ, कमर, उदर, पीठ, मेरुदण्ड, फेफड़े, हाथ की अंगुलियाँ, कुहनी, स्कध, ग्रीवा, आँख, सिर, पाचनतंत्र के अंग आदि सभी भाग क्रियाशील हो जाते हैं और उनके विकार दूर होकर हमें निरोगी काया प्रदान करते हैं।

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