उज्जायी प्राणायाम के फायदे और विधि – ujjayi pranayama in hindi

यौगिक प्राणायाम में उज्जायी प्राणायाम बहुत रुचिकर और लाभदायक तकनीकें हैं। एकाग्रता बढाने में और ध्यानावस्था को प्राप्त करने में उज्जायी प्राणायाम मदद करता हैं। जाप या उच्चार से उत्पन्न होने वाली तरंगें मनोदशा बदलने का आधारभूत उपकरण हैं। उज्जायी शब्द का अर्थ है जीतने वाला। उज्जायी प्राणायाम जागरुकता बढाने में मदद करता है। उज्जायी प्राणायाम को खडे होकर या चलते हुए भी किया जा सकता हैं साथ ही प्राणायामों के अन्य अभ्यासों के साथ संयोजित करके भी किया जा सकता है। इस लेख में उज्जायी प्राणायाम के फायदे, उज्जायी प्राणायाम करने की विधि(ujjayi pranayama in hindi) के बारे में जानकारी दी गई है।

उज्जायी प्राणायाम के फायदे – ujjayi pranayama in hindi

• उज्जयी प्राणायाम से एपिग्लाटिस पेशियां मजबूत होती हैं अत: यह खुरार्टो को कम करता हैं।
• आवाज को मधुर बनाता हैं और इसे एक स्तर पर लाने में मदद करता हैं।
• टांसिल्स, दमा, जुकाम, हिचकियां और कंठ की अति संवेदनशीलता (जल्दी संक्रमण ग्रहण करने की प्रवृत्ति) से आराम दिलाता है।
• चिंता दूर करके मन को शांत करता है।
• जागरुकता बढाता है।

उज्जायी प्राणायाम की विधि – ujjayi pranayama in hindi

• किसी भी आरामदायक आसन में बैठे।
• चेहरे की पेशियों को तनव मुक्त करें और हल्की मुस्कान लाएं। यह न केवल आपको आराम का अनुभव कराएगी वरन क्षमता से अधिक अभ्यास से भी बचाएगी।
• अपने कंठ पर ध्यान केंद्रित करें। ऐसा महसूस करें कि कंठ के सामने एक नन्हा सा छेद हैं जिससे श्वास अंदर जा रही हैं। इस तरह हम कंठ को सिकोडकर लेरिंक्स नली को छोटा करेंगे जिससे वायु कंठ से गुजरते समय सी..सी..(हिसिंग साउंड) की आवाज करेगी।
• यह ध्वनि हल्की और एकसमान होनी चाहिए और सुनने में मधुर लगनी चाहिए। यह केवल हमें ही सुनाई देनी चाहिए, दूसरों को नहीं।
• नाक से हवा के प्रवाह बिना रुकावट होना चाहिए जिससे नाक से आवाज न आए। • पहले उज्जयी केवल प्रश्वास के समय करें, उसके बाद श्वास-प्रश्वास दोनों समय करें।
• हठ योग में लिखे अनुसार प्रश्वास केवल बाएं नथुने से होना चाहिए। प्रश्वास में लगा समय श्वास में लगे समय से दोगुना होना चाहिए।
• बाएं नथुने से या दोनों नथुनों के प्रयोग से प्रश्वास करते ही सांस जरा देर के लिए रुकती हैं और फिर श्वास अंदर ली जाती हैं। यही केवल कुंभक अवस्था हैं। शांत चित्त से इसका आनंद ले और सहजता से जितनी देर रह सके, इस अवस्था में रहें।
• यह उज्जयी का एक चक्र हैं। इसके कम से कम ९ चक्र पूर्ण करने की सलाह दी जाती है।
• यौगिक क्रियाओं के अभ्यस्त हो चुके लोग हर श्वास और प्रश्वास के बाद केवल कुंभक की स्थिति को प्राप्त करते है।

उज्जयी श्वास प्रक्रिया का विज्ञान उज्जयी धीमी धीमे और एक हद तक नियंत्रित श्वास प्रश्वास की प्रक्रिया हैं जिसमें हवा के पथ को रोधित रखकर क्रिया को प्रेरित व समाप्त किया जाता हैं। उज्जयी प्राणायाम करते हुए व्यक्ति का ई. ई. जी. परीक्षण करते समय यह सामने आया कि इस अभ्यास को करते समय अल्फा गतिविधि प्रेरित होती हैं जो पी एन एस तंत्र को प्रेरित करती हैं और इस तंत्र का संबंध शरीर को संतुलित, शांत और आरामदायक अवस्था में लाने से होता है। इसी तरह सी.. सी.. की आवाज वेगा तंत्रिका पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं जो पुनर्जीवन देनेवाले तंत्र पी एन एस का मुख्य भाग हैं जो कि शारीरिकी को क्रियाशील बनाने और ऊर्जा को पुन: संचित करने का काम करती है। अत: इस प्राणायाम को करने के बाद व्यक्ति मानसिक शांति और आराम का अनुभव करते है। उज्जयी प्राणायाम से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बढता हैं जो मस्तिष्क की सक्रियता के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।

उज्जायी प्राणायाम वीडियो – ujjayi pranayama video in hindi

Wikipedia 

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