स्वर योग /Swar Yoga: नासिका श्वसन और मन की अवस्था

प्राचीन योग ऋषियों ने नथुनों से श्वास गति में होने वाले परिवर्तन के बारे में पूर्ण विज्ञान हमारे सामने रखा था जिसे स्वर योग कहा जाता हैं। स्वर योग के बारे में प्राचीन काल में लिखे गए आलेख “शिव स्वरोदय” के अनुसार श्वास लेते समय कौनसा नथुना खुला हैं या वायु के प्रवाह हेतु अधिक सक्रिय हैं इसका भी प्रभाव मन की अवस्था / गतिविधि पर पडता है। इसलिए स्वर योग को शरीर की प्राकृतिक लय का पुरातन विज्ञान कहा जा सकता है। यह हमें बताता हैं कि श्वास के नियमन द्वारा प्राण ऊर्जा को किस तरह नियंत्रित किया जा सकता हैं जो शरीर और मन को प्रभावित करता है। स्वर का अर्थ है श्वास की ध्वनि और योग अर्थात मिलना। स्वर योग के उतार-चढाव से शरीर की कई अन्य क्रियाएँ जैसे आंतरिक अंगों की कार्य क्षमता, बीमारियों का उत्पन्न होना और मन की अस्थिरता जुडी होती हैं।

नथुने केवल वायु के प्रवेश द्वार नहीं हैं बल्कि हमारे शरीर में छिपी ऊर्जा का प्रवेश द्वार भी है। हमारे नाक के दोनों नथुने शरीर पर विशेष प्रभाव डालते हैं। जब हम अपनी श्वास का निरीक्षण करते हैं तो हमें समझ में आएगा कि दोनों नथुनों के वायु प्रवाह में खास अंतर होता है। कभी कभी दायां नथुना अधिक सक्रिय होता हैं तो कभी बायां। यह सामान्य घटना हैं जो सभी के साथ होती है। अब तो विज्ञान ने भी यह सिद्ध किया हैं कि हर नथुना अपनी श्वास गति को हर डेढ से दो घंटे में धीमी करता हैं।

स्वर योग/Swar Yoga

1. नथुनों का नियमित रूप से प्रयोग – नथुने नियमित रूप से प्राकृतिक और लयात्मक तरीके से एक के बाद एक क्रियाशील होते हैं। किसी स्वस्थ व्यक्ति में हर डेढ या दो घंटे में श्वास या तो दाएं या बाएं नथुने से ली जाती है।

2. नथुने से श्वसन और शरीर की क्रियाएँ- स्वर योग ऐसा मानता हैं कि बाएं नथुने के श्वसन द्वारा शरीर की ऊर्जा बाहर निकलती हैं और ठंडक का अनुभव होता है। इसलिए बाएं नथुने को चंद्र नाडी कहा जाता हैं और यह इड़ा नाड़ी से जुड़ा होता है। दायां नथुना सूर्य नाडी कहलाता हैं और पिंगला नाडी के साथ जुडा रहता हैं जो ऊर्जा उत्पन करने वाली, ऊर्जा खर्चने वाली होती है।

आश्चर्यजनक फायदेमंद होता है कपालभांति। Kapalbhati benefits

3. नथुने से श्वसन और मन की अवस्था- स्वर योग के अनुसार मन की कुछ अवस्थाएं श्वसन पर निर्भर करती हैं। दाएं नथुने के अधिक प्रयोग से अधिक सक्रियता, प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता बढती है। बाहर घटनेवाली घटनाओं के प्रति जागरुकता बढ जाती है। बाएं नथुने के अधिक प्रयोग से मन की शांत और ग्रहणशील अवस्था प्राप्त होती है। साथ ही रचनात्मकता, परिपाक और संग्रहण क्षमता बढती है।

  स्वर योग विज्ञान

चिकित्सा विज्ञान ने हाल ही में यह माना हैं कि हम दोनों नथुनों से एक साथ और समान रूप से श्वास नहीं लेते। एक समय में किसी एक नथुने से श्वसन करना आसान होता है। स्वस्थ व्यक्ति में हर एक से डेढ घंटे में श्वास के लिए उपयोग में आने वाला नथुना बदलता हैं। यदि एक नथुना असामान्य रूप से बहुत अधिक समय तक सक्रिय रहता हैं तो यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। सक्रियता का समय विभिन्न व्यक्तियों में आयु, जीवन शक्ति और शारीरिक स्वास्थ्य की तात्कालिक अवस्था पर निर्भर करता है। नासा चक्र मस्तिष्क के कार्यो के अनुसार संचालित होता हैं और उनसे मेल खाती है। नासा चक्र का असंतुलन मानसिक उथल-पुथल, मिज़ाज मे बदलाव और एकाग्रता की कमी को जन्म देता है।  यदि दायां नथुना अधिक प्रमुखता से कार्य करता हैं तो इसका परिणाम मानसिक और तंत्रिकीय गडबड के रूप में सामने आता है। जब बायां नथुना सक्रिय हो जाता हैं तो थकान और जीवन शक्ति की कमी जैसे परिणाम सामने आते हैं।

प्राणायाम की शक्ति और लाभ ! Pranayama

योग की शक्ति,योग क्या है? और इसके आठ अंग !Yoga In Hindi

इस लेख में आपको स्वर योग  से सम्बंधित दी हुई जानकारी केसी लगी कृपया कमेंट करके जरूर बताये और भी भक्ति और मेडिटेशन से सम्बंधित लेख पड़ने के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करे।

आज का पंचांग 

शिव स्वरोदय

स्वर योग,Swar yoga, swar yigyan yoga, swar yoga in hindi

Leave a Comment