प्राणायाम/Pranayam: प्राण और आयाम की शक्ति और लाभ !

शरीर और मन एक दूसरे के साथ ऊर्जा के जीवंत तंत्र से जुडे हुये हैं जो स्वॉंस के प्रवाह से चलता है। जीवन, ऊर्जा और श्वास एक दूसरे से जुडे हुए हैं इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। प्राणायाम हमें इस तंत्र को जानने में मदद करता है। प्राणायाम शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हैं। प्राण और आयाम। इन्हें श्वास और नियंत्रण के रूप में जाना जाता है अर्थात श्वास की गति पर नियंत्रण। ऋषि पतंजलि ने कहा है कि प्राणायाम वास्तव में योग का सबसे महत्वपूर्ण अंश है। प्राणायाम केवल श्वास का अभ्यास नहीं है जैसा आमतौर पर हम इसे समझते है। यह सारी दुनिया की ऊर्जा का स्त्रोत हैं जो श्वसन प्रक्रिया द्वारा हमारे अंदर अद्भुत ऊर्जा का निर्माण करती हैं। हमारी श्वसन क्रिया जीवन की एक लय है। कमजोर श्वसन प्रक्रिया जीवन की लय को बाधित करती है। प्राणायाम/Pranayam के अंतर्गत की जाने वाली गहन श्वसन क्रियाएं शरीर को उसकी लय पुन: प्राप्त करने में सहायता करता है।

प्राणायाम/Pranayam की शक्ति

प्राणायाम से ऊर्जा शक्ति हमारी श्वास के द्वारा शरीर में प्रवाहित होती है। यह शरीर के अंदर ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित होकर शरीर के आंतरिक और बाहरी कार्यो को करने में हमारी मदद करती है। प्राणायाम हमे अनेक मानसिक और शारीरिक विषैले तत्वों से मुक्ति मिलती है।
मन के लिए प्राणायाम: प्राण की मदद के बिना मन कार्य नहीं कर सकता क्योंकि प्राण के कंपन से मन विचारों को उत्पन्न करता हैं। स्वाँस स्थूल है और प्राण सूक्ष्म हैं, अत: श्वास, प्राण और मन एक दूसरे से जुडे होते हैं। प्राणायाम वह साधन है जो मन और शरीर को श्वास द्वारा जोडता है। प्राणायाम का नियमित अभ्यास करके श्वास पर नियंत्रण पाकर हम सूक्ष्म प्राण को नियंत्रित कर सकते हैं। प्राण पर नियंत्रण का अर्थ है मन पर नियंत्रण। प्राणायाम का छोटा सा चमत्कार है मन का उच्च स्तर तक शुद्धिकरण करना। ऋषि पतंजलि के योग सूत्र के अनुसार जब हम प्राणायाम का अभ्यास करते हैं तो मन का आलस और अज्ञान दूर हो जाता हैं और विचारों की स्पष्टता के कारण मन की शक्ति बढती है। प्राणायाम ज्ञान के प्रकाश को आलोकित करके मन को पावन बनाता है। प्राणायाम से शारीरिक क्रियाएं और मानसिक व्यवहार में समन्वय आता हैं।

श्वसन तंत्र- प्राणायाम से फ़ेफ़डों का लचीलापन बढता है। प्राणायाम के अभ्यास से डायफ्राम की गति से हृदय की मालिश होती हैं जिससे हृदय की कार्य क्षमता बढती हैं, रक्त परिवहन सुचारु बनता है। प्राणायाम से पेट, आंत, जिगर और अग्नाशय की मालिश होती हैं जो इन्हे पुष्ट बनाती है। प्राणायम स्पाइनल तंत्रिकाओं की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाता हैं और हार्मोन स्त्रावित करने वाली ग्रंथियों में रक्त प्रवाह को उन्नत करके ग्रन्थियों की गतिविधि को बेहतर बनाता हैं। इसके अलावा यह एड्रीनोकार्टिकल ग्रंथि की गतिविधि को क्षीण करता है जो तनाव को बनाए रखने का कार्य करती है। यह हानिकारक कणों की मात्रा को कम करता है और शरीर को स्वस्थ रखने वाले एंटीआक्सीडेंट की मात्रा को बढाता है।

प्राणायाम के लाभ

1. तनाव कम करता है – प्राणायाम तनाव काम करने की उत्तम विधि है। प्राणायाम हमें सिखाता है कि सारे व्यवधानों के बावजूद आत्मिक शांति कैसे प्राप्त की जाए। प्राणायाम तनाव प्रबंधन में काम आने वाली पेशियों पर कार्य करके उन्हें पुष्ट करता है ताकि वे शरीर की रक्षा हेतु कार्य कर सके।
2. व्यवहार में सकारात्मक बदलाव- प्राणायाम से मन के अवचेतन में व्याप्त समस्त नकारात्मक विचार बाहर निकल जाते हैं और सकारात्मक तरंगे प्रवाहित होती हैं जिससे अवसाद को दूर करने में मदद मिलती है। प्राणायाम के समय श्वास लगातार धीमी, गहरी और लयात्मक होती जाती हैं जिससे अपने आप में शांति, संतुलन और आराम का अनुभव होने लगता हैं। इससे हमारे व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आता हैं और हमारा सारा व्यक्तित्व बदलने लगता हैं।
3. आंतरिक जागरूकता और संवेदनशीलता- श्वास पर ध्यान केन्द्रित करने की प्रक्रिया हमारे दिमाग के जागरुक हिस्से निओ कार्टेक्स को सक्रिय करती हैं। प्राणायाम सीखने की प्रारंभिक अवस्था में हम श्वास पर ध्यान देते हैं और हमें तेज़ी से इसके फायदे दिखाई देने लगते हैं मगर इससे यह प्रक्रिया मशीनी बनती जाती हैं जिससे धीरे-धीरे इस प्रक्रिया में एकरसता का आभास होने लगता हैं। जागरुकता तभी आती है जब ध्यान और संवेदनशीलता का साथ साथ अभ्यास किया जाए। मगर दुर्भाग्य से संवेदनशीलता कठिनाई से प्राप्त हो पाती हैं। प्राणायाम का अभ्यास ही हमें आंतरिकता संवेदनशीलता का विकास करने में सहायता कर सकता हैं।

4. साक्षी भाव का उत्पन्न होना- प्राणायाम का नियमित अभ्यास हमें अपनी भावनाओं पर काबू करने में समर्थ बनाता हैं जिससे आंतरिक शांति, संतुलन और साक्षी भाव उत्पन्न होता है।
5. मन की शक्ति- यह प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य है। जब मन स्थिर हो जाता है तो कोई भी विचार, कोई भी भावना इसे विचलित नहीं कर सकती। हम अपने स्वभाव, लालसाएं, मिजाज और वृत्ति पर प्राणायाम(Pranayama yoga) के अभ्यास द्वारा नियंत्रण पा सकते हैं। जैसे ही श्वास पर नियंत्रण प्राप्त हो जाता है, मन की गतिविधियाँ भी नियंत्रित हो जाती हैं।

6. ध्यान की तैयारी- प्राणायाम के निरंतर और गहन अभ्यास से मन शांत और रिक्त हो जाता हैं और शांति और स्थिरता की वह अवस्था प्राप्त होने लगती हैं जिसके लिए हम सतत प्रयास करते रहते हैं। ऐसा इसलिए संभव हो पाता हैं कि हमारे मन में उठने वाले निरर्थक विचार जो हमारे मन को विचलित करते हैं, प्राणायाम(Pranayam) के द्वारा बाहर निकाल दिया जाता हैं जिससे हमारा मन स्थिर और शांत होकर ध्यान के अभ्यास के लिए तैयार होने लगता है।

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