गायत्री साधना के लिये विधि और नियम :Gaytri Mantra Sadhna

गायत्री Gaytri Sadhna  नर नारी, बाल-वृद्ध तथा युवा सभी लोग कर सकते हैं । गायत्री साधना का प्रयोग कोई भी इंसान अपने जीवन को ही प्रयोगशाला मानकर स्वयं करके देखे, वह स्वयं अनुभव करेगा कि वास्तव में विचारों एवं भावों में सकारात्मक परिवर्तन आता जायेगा। उसका आंतरिक तेज बढ़ता जायेगा और आत्मविश्वास बढ़ता हुआ प्रखर व्यक्तित्व एवं उज्ज्वल चरित्र बनता चला जायेगा। गायत्री साधना या गायत्री अनुष्ठान करने के लिए कुछ नियम होते है आज इस लेख में गायत्री साधना कैसे करे?, गायत्री साधना के नियम क्या है इन सब के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे!

गायत्री साधना विधि | Gaytri Sadhna Vidhi

Gaytri Sadhna किसी शुभ दिन में आरम्भ करना चाहिए। चैत्र और अश्विन की नवरात्रा लघु अनुष्ठान के लिये अधिक उपयुक्त हैं। वैसे कभी भी सुविधानुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ इसे शुरू किया जा सकता है। पूजा में बैठने से पहले आचमन अवश्य करें क्योंकि आचमन से शरीर मन और वाणी हमेशा शुद्ध रहने की भावना होती है। अनुष्ठान आरम्भ करते हुए नित्य गायत्री माता का आवाहन करे !

गायत्री अनुष्ठान से साधक को अनेक प्रकार की गुप्त आध्यात्मिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। गायत्री अनुष्ठानों की तीन श्रेणियाँ है
(1) लघु अनुष्ठान में 24 हजार जप 9 दिन में पूरा करना पड़ता है। (2) मध्यम में सवा लाख जप 40 दिन में पूरा करना पड़ता है। (3) पूर्ण अनुष्ठान 24 लाख जप का होता है। उसमें एक वर्ष लगता है। 24 लाख यदि एक वर्ष में करना हो तो 66 माला प्रतिदिन करनी पड़ती है। अनुष्ठान पूरा होने पर गायत्री यज्ञ करके अनुष्ठान की पूर्णाहुति जी जाती है। यज्ञ में जप के सतांश भाग की आहुतियाँ दी जाती है किन्तु यदि संकल्पित जप का 10वा भाग अतिरिक्त जप कर दिया जाय तो आहुतियों का प्रतिबन्ध नहीं रहता है।

गायत्री साधना कैसे करे

1. साधना के समय शरीर पर हलके ढीले वस्त्र रहने चाहिये

2. गायत्री साधना के लिये घर में एकांत जगह ढूंढनी चाहिये जहाँ का
वातावरण शांतिमय हो

3. पालथी मारकर, कमर सीधी करके बैठे

4. बिना आसन के जमीन पर साधना करने के लिये नहीं बैठना चाहिये।

5. जप के लिये माला तुलसी अथवा चंदन की लेनी चाहिये

6. प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में जप आरंभ किया जा सकताहै। सूर्यास्त होने के बाद दो घंटे बाद तक जप समाप्त कर लेना चाहिये

7. गायत्री साधना में चित्त एकाग्र रखने हेतु गायत्री माता की सुंदर छवि में ध्यान लगाना चाहिये

8. गायत्री माता के प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास रखना चाहिये

9. सांसारिक कठिनाईयों, बाधाओं से लड़ते हुये उत्साह, दृढ़ संकल्प के साथ गायत्री साधना पथ पर बढ़ना चाहिये

10. साधना क्रम में निरंतरता अनिवार्य होना चाहिये

11. Gaytri Sadhna में कम से कम एक माला नियमित जपनी चाहिये, ज्यादा भी कर सकते हो अपने सामर्थ्य अनुसार

12. अपनी पूजास्थली पर इष्ट के समक्ष बैठकर उपासना करें। संभव हो तो  सूर्य की ओर मुँह रखना उचित है

13. मंत्र(Gaytri Mantra) जप इस प्रकार करना चाहिये जिसमें कंठ, ओंठ व जिव्हा तो चलते रहें परंतु उच्चारण इतना मंद हो कि पास बैठा व्यक्ति भी उसे ठीक तरह से न सुन सके

14. पूजा के समय कलश रूप में जल-पात्र रखना चाहिये और अग्नि की साक्षी के लिये दीपक या धूपबत्ती जला लेनी चाहिये। इस प्रकार अग्नि और जल की साक्षी में किया हुआ जप अधिक प्रभावशाली होता है। आचमन के लिये जल-पात्र अलग से रखना चाहिये। पूजा के अंत में कलश रूप में स्थापित जल सूर्य की दिशा में प्रात:काल पूर्व में और सायंकाल पश्चिम में अर्घ्य जल को चढ़ा दिया जाये

15. महिलायें मासिक धर्म के दिनों में माला सहित जप न करें। उंगलियों पर गिनकर मानसिक रूप से जप किसी भी स्थिति में किया जा सकता है

16. स्त्रियों को भी पुरुषों की तरह ही गायत्री उपासना का पूर्ण अधिकार है

17. मल-मूत्र त्याग या किसी अनिवार्य कार्य के लिये साधना के बीच में उठना पड़े तो शुद्ध जल से हाथ-मुँह धोकर दोबारा बैठना चाहिये और विक्षेप के लिये एक माला अतिरिक्त जप प्रायश्चित स्वरूप करना चाहिये।

18. जन्म, मृत्यु का सूतक हो जाने पर शद्धि होने तक माला आदि की सहायता से किया जाने वाला विधिवत जप स्थगित रखना चाहिये। केवल मानसिक जप, मन ही मन चालू रख सकतेहैं।

19. लंबे सफर में होने पर, स्वयं रोगी हो जाने या गंभीर रोगी की सेवा में संलग्न रहने की दशा में स्थान आदि की पवित्रता की सुविधा नहीं रहती, तो ऐसी दशा में मानसिक जप बिस्तर पर पड़े-पड़े, रास्ता चलते या किसी पवित्र-अपवित्र दशा में किया जा सकता है। मानसिक जप का अर्थ है-बिना होंठ हिलाये मन ही मन जप करना।

18. साधक का आहार-विहार सात्विक होना चाहिये।

19. गायत्री साधना माता की चरण वंदना के समान है, यह कभी निष्फल नहीं होती। उलटा परिणाम भी नहीं होता, भूल हो जाने से अनिष्ट होने की भी कोई आशंका नहीं होती इसलिये निर्भय और प्रसन्न चित्त से उपासना करनी चाहिये

बताये गए Gaytri Sadhna के नियमो का पालन करते हुए गायत्री माता का स्मरण करे आपको गायत्री उपासना के चमत्कारिक सामर्थ्य के बारे में अनुभूती होगी !

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