kapalbhati pranayam: नई ऊर्जा का संचार करता है कपालभांति प्राणायाम

कपालभांति (kapalbhati pranayam) शरीर की अशुद्धियों को दूर करती हैं। कपाल शब्द का संस्कृत में अर्थ है माथा और भांति का अर्थ है चमक अत: कपालभांति का शाब्दिक अर्थ हैं शरीर और मन की शुद्धि द्वारा चेहरे पर चमक। कपालभांति योग अभ्यास में कई अलग-अलग प्रकार के अनुशासन सम्मिलित हैं। आइये इस लेख की सहायता से कपालभांति क्या है (kapalbhati pranayam), कपालभांति ,कपालभांति की विधि (Kapalbhati Benefits in Hindi) और सावधानियों पर प्रकाश डालने का प्रयास करते हैं।

कपालभांति के लाभ/Kapalbhati pranayam

•शरीर की थकान और उनींदापन दूर करके शरीर को ऊर्जान्वित और युवा बनाती है।
• दिमाग की कोशिकाओं में चैतन्य लाकर स्मृति और समझ को विकसित करती है। शरीर में आक्सीजन का संचार बढाती हैं जिससे मस्तिष्क अच्छी तरह से काम करता है।
• लगातार अभ्यास से शरीर के विषैले तत्व दूर हो जाते हैं और चेहरे पर चमक आती है।
• यह तंत्रिका तंत्र को शक्तिशाली बनाता हैं।
• उदर पेशियों को ताकतवर और लचीला बनाती हैं।
• उदर गुहा में स्थित अंगों की मालिश से पाचन संबंधी तकलीफ़ों को दूर करती हैं। • फ़ेफ़डों और समस्त श्वसन तंत्र को साफ करता है, इनकी क्षमता को बढाता है जिससे श्वसन संबंधी समस्याओं से निजात मिलती हैं।
• हृदय गति बढने से शरीर के सारे अंगों में रक्त प्रवाह सुचारु रूप से होता है।
• चयापचय की क्रिया की गति बढाता है जिससे मधुमेह और मोटापे से ग्रस्त लोगों को लाभ होता है।
•कपालभाति में नथुनों के अंदर का हिस्सा और सायनस के हिस्से को स्वच्छ किया जाता है।
•शरीर और मन को हानि पहुंचाने वाली गैस कार्बन डाई आक्साइड को बाहर निकाला जाता है।
•कपालभांति श्वसन मार्ग को साफ़ करती है और शरीर के कफ़ को बाहर निकालती हैं।
•जब हमें सिर में, आंखों में भारीपन महसूस होता हैं तो kapalbhati pranayam करने से राहत मिलती है।
•कपालभांति का अभ्यास करने से शरीर में हल्कापन महसूस होता हैं और मन में जागरुकता आती है। इस तरह कपालभांति से चेहरे पर चमक और मन में प्रकाश छाता है।

कपालभांति करने की विधि

• किसी आरामदायक अवस्था में कमर सीधी करके ऐसे बैठे जिससे शरीर को स्थिर रखते हुए उदर की पेशियों को आसानी से हिलाया-डुलाया जा सके।
• अपनी हथेलियों को जांघों या घुटनों पर रखें। इससे रीढ सीधी रखने और कंधों को पीछे खींचने में मदद मिलेगी।
• नाक को आराम की अनुभूति देते हुए चेहरे पर मुस्कान लाएं।
• छाती को फुलाते हुए गहरी सांस खींचे और इसे रोककर रखें। अब उदर पेशियों की मदद से श्वास को तेजी से बाहर निकाले। इसके बाद फिर गहरी सांस (बिना आवाज किए) खींचे। केवल नाक से ही सांस ले।
• श्वास छोडते समय पेट की पेशियों को तेजी से ऊपर की दिशा में गति दे। श्वास लेते समय उदर पेशियों को ढीला छोड़े ताकि वे प्रश्वास की क्रिया हेतु तैयार हो सके। इसी तरह अभ्यास करने वाले को अगले पद हेतु तैयार करें।
• कपालभांति के सही अभ्यास में वायु एक खास आवाज के साथ, बिना चेहरे को विकृत किए बाहर निकलती है। यह क्रिया केवल डायफ्राम की गति से ही संचालित होती हैं और इसमें छाती, कंधे, गर्दन और चेहरे की पेशियां भाग नहीं लेती।

• लय- अभ्यास नियमित और एक ही गति में होना चाहिए। अनियमित और झटके से ली जाने वाली सांसें शरीर में अतिरिक्त वायु लेने की प्रवृत्ति को जन्म देती है।
• ठहराव- एक चरण समाप्त होने के बाद थोडा रुके। शांत और स्थिर रहकर शरीर और मन का अवलोकन करें और शांति का अनुभव करें। मौन में स्थिरता और शांति का अनुभव कर गहन आराम और ताज़गी देने वाली इस क्रिया का आनंद ले।
• श्वास सामान्य होने तक रुके और फिर अगले चरण की ओर बढें। कितना अभ्यास करें? यदि आप अभ्यास करते समय थकान का अनुभव करें या पेट या पीठ में दर्द या असहजता महसूस करें तो थोडी देर रुके या गति को धीमा करें।

kapalbhati pranayam में सावधानियाँ

• यह अभ्यास सुबह जल्दी उठकर और खाली पेट करना चाहिए जिससे पाचन की समस्याओं से बचा जा सके। यदि आप ऐसे खाने के बाद करना चाहते हैं तो खाने के बाद कम से कम दो से तीन घंटे का समय रखकर फिर कपालभांति का अभ्यास करें।
• गलत आसन (जैसे कंधे झुकाकर, पीठ झुकाकर) में बैठने से बचे अन्यथा गर्दन, पीठ या पेट में दर्द की शिकायत हो सकती है।
• इस क्रिया के समय छाती को स्थिर रखें और उदर पेशियों को ही गति करने दें। • अभ्यास के समय अनायास थकान या सिर में भारीपन प्रतीत होने पर अभ्यास रोकें और आराम करें।
• गर्भावस्था या माहवारी के समय औरतों को इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए।
• ऐसे व्यक्ति जो असंतुलित रक्तचाप, हृदय रोग, वर्टिगो, ग्लुकोमा, नकसीर फूटना, कान बहना, मिर्गी, हार्निया, स्लिप डिस्क, पेट के छाले आदि से पीडित हो उन्हें इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए।

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